Sunday, October 27, 2013

पटना धमाके कोई राजनीतिक षड़यंत्र तो नहीं ?

पटना में सिलसिलेवार बम धमाके , कितने निर्दोष लोगो की जान गयी , कितने घायल हुए ! ऐसा करके किसी को क्या हासिल हो सकता है ? कौन है जो इस से फायदा उठा सकता है , नरेन्द्र मोदी जी बिहार में हुंकार रैली दूसरी तरफ राहुल गाँधी की डेल्ही में रैली ! एक तरफ लाखो की भीड़ , दूसरी तरफ खली पड़ी कुर्सिया ! और उस सबसे भी ऊपर , इस रैली से पहले इस रैली के न होने देने दुसरे शब्दों में इसको रोकने की तमाम कोशिशे नाकाम होने का जो खेल चला उस सबको देखते हुए कुछ सवाल खुद दिमाग में आ रहे है !
                      
                          धमाके और रैली वाले स्थान के बीच में सिर्फ चंद किलोमीटर का फासला , क्या धमाको का उद्देश्य भगदड़ मचाना तो नहीं था ! अगर ऐसा हो गया होता तो ना जाने आज हम कितने हज़ार लोगो की जान से हाथ धो बैठते ? जब रैली के लिए रेलगाड़िया द्वारा रैली समर्थक उस स्थान तक जा रहे थे तो सबसे पहला धमाका स्टेशन पर ही क्यों ? जब केंद्र सर्कार और इंटेलिजेंस ब्यूरो ने अलर्ट किया था बिहार सरकार को फिर ऐसी कोताही क्यों ?? सारे धमाके रैली स्थल के इर्द गिर्द ही क्यों ?? 
                   
                         जरा सोचकर देखिये अगर आज ये धमाके नहीं हुए होते , तो आज न्यूज़ चैनल्स पर किस तरह की बहस हो रही होती ! राहुल की रैली में इतने लोग , मोदी के रैली में इतने लोग ! क्या राहुल की रैली एक फ्लॉप शो है ? क्या मोदी की रैली मेगा हिट ? 

                     जो भी हो भाजपा के कर्यकर्तायो और नेताओ की सुझबुझ तारीफे काबिल है ! इस तरह के तानाव भरे महॊल में जिस तरह भीड़ को बहकने , से बचाने के तमाम उपाए किये गए वो सराहने योग्य है !
वह उपस्थित लोगो की भ सरहना करनी होगी जिस तरह का अनुशाशन दिखाया गया ऐसे माहोल में उसने धमके करने वालो के मुह पर करारा तमाचा मारा है !
                  
                    खेर ये सब तो राजनीतिक बाते है सो शायद इस सबसे ऊपर उठकर पहले देश के बारे में सोचना चाहिए ! धमाके हुए ये गलत हुआ , बस अब भगवान् से यह दुआ है की शांति बनी रहे , और उम्मीद करता हूँ की इन धमको के जांच में राजनीतिक पहलु न  निकल कर आये ! इस देश के लिए और इस देश की राजनीती के लिए यही अच्छा होगा की इस तरह की गन्दी राजनीती न हो ! 

                                                                                                                            वतन भटनागर